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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, ‘बंद क्यों नहीं कर देते?’

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शहर में विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से तीखा सवाल किया है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को अनावश्यक रूप से प्रदर्शनों की वजह से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शहर के बीचों-बीच इस तरह की गतिविधियों से आम जनजीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।

अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति की याचिका पर हुई सुनवाई

यह पूरा मामला अदालत में अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति की ओर से दायर की गई याचिका पर चल रहा था। याचिकाकर्ता संगठन ने दिल्ली पुलिस को जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया था कि इस प्रदर्शन में सिर्फ 75 लोग शामिल होंगे, लेकिन पुलिस पिछले कुछ महीनों से उनके आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले रही है।

15 अगस्त के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और धारा 144 का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा पहले से ही विचाराधीन है कि जंतर मंतर को आधिकारिक तौर पर प्रदर्शन स्थल घोषित किया जाए या नहीं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण इलाके में धारा 144 लागू है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं, ऐसे में अनुमति देने पर भीड़ बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर कोर्ट की दो टूक, पुलिस को 8 अगस्त तक फैसला लेने का आदेश

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों का हवाला दिया गया। इस पर न्यायमूर्ति महाजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का अपना स्थान है, लेकिन इसके नाम पर पूरे शहर को परेशानी में नहीं डाला जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन पर 8 अगस्त तक अपना फैसला ले, जिसके बाद इस याचिका का निपटारा कर दिया गया।

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