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कौन हैं शौर्य कमांडो, जिन्हें चीन सीमा पर चुनौतियों से निपटने के लिए किया गया तैयार?

अलवर। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ है। राजस्थान के अलवर में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीमा पर उत्पन्न होने वाली किसी भी टकराव की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष रूप से 'शौर्य कमांडोज' की टुकड़ियों का गठन किया गया है, जिन्हें हर बटालियन में तैनात किया जा रहा है।

शौर्य कमांडोज और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की रणनीतियां

आईटीबीपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल सीमा पर पारंपरिक सैन्य संघर्ष का दौर अब पीछे छूट चुका है, और इसी को ध्यान में रखते हुए सामरिक क्षमताओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। चीनी सेना की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बनाई गई ये विशेष शौर्य कमांडो इकाइयां अत्यधिक ऊंचाई वाले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इससे पहले भारतीय सेना की दक्षिणी कमान द्वारा भी 'शौर्य स्क्वाड्रन' के माध्यम से आधुनिक युद्धक्षेत्रों में सटीक हमले और गहन निगरानी अभ्यासों का सफल प्रदर्शन किया जा चुका है, जो बदलती सामरिक आवश्यकताओं का प्रमाण है।

सीमा पर सुरक्षा ढांचे का आधुनिकीकरण और नई तैयारियां

चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए भारत सरकार ने व्यापक स्तर पर निवेश बढ़ाया है। आईटीबीपी के आधुनिकीकरण के तहत मिलने वाले बजट का एक बड़ा हिस्सा ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों की खरीद के साथ-साथ जवानों के विशेष प्रशिक्षण पर खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा गलवान घाटी जैसी किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए एक नया स्ट्राइक कोर्स शुरू किया गया है। अत्यधिक ठंड वाले पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुविधा के लिए आधुनिक गर्म बंकरों, सोलर वाटर हीटर और वाहनों के लिए विशेष कोल्ड स्टार्ट तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रबंध किया जा रहा है, ताकि कठिन से कठिन मौसम में भी सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद रहें।

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