ईरान युद्ध से अमेरिका नहीं निकला तो क्या होगा? ट्रंप के जनरल ने सीक्रेट मीटिंग में चेताया

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के मध्य पिछले करीब छह महीनों से लगातार जारी संघर्ष अब एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले और यूएस ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने अब इस खर्चीली और लंबी खिंचती जंग से बाहर निकलने की पुरजोर पैरवी की है। व्हाइट हाउस के सर्वोच्च अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से यह बात रखी है कि वाशिंगटन को अब ईरान के साथ चल रहे इस टकराव का कोई कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान तलाशना चाहिए।
हवाई हमलों की सीमाएं और रक्षा भंडारों में कमी
विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में जनरल डैन केन के साथ-साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ सहित प्रशासन के कई प्रमुख कैबिनेट मंत्री मौजूद थे। बैठक के दौरान जनरल केन ने सैन्य और खुफिया आकलन का हवाला देते हुए दो टूक कहा कि केवल हवाई बमबारी के जरिए ईरान को घुटने टेकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले छह महीनों से चल रहे इस युद्ध के चलते अमेरिकी सेना के हथियारों और गोला-बारूद का भंडार भी काफी कम हो गया है, जो आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आगामी बैठक और सैन्य विकल्पों का आकलन
इस आंतरिक बैठक के बाद जनरल डैन केन की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक और अहम मंत्रणा होने वाली है। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति के सामने अमेरिकी सेना के वर्तमान सैन्य विकल्पों, उनकी सीमाओं और संभावित खतरों का पूरी तरह से पारदर्शी खाका पेश करना है। विश्लेषकों का मानना है कि सेना के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस तरह का रुख अपनाना अमेरिकी सैनिकों को किसी भी बड़े और अनियोजित नुकसान से बचाने की एक रणनीतिक पहल है, ताकि जमीन पर किसी भी जोखिम भरे कदम से बचा जा सके।
कूटनीतिक समाधान की तलाश और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फोकस
एक तरफ जहां अमेरिकी सैन्य अधिकारी राष्ट्रपति को युद्ध के गंभीर परिणामों के प्रति आगाह कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप अंतिम आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, हजारों सैनिकों की जान खतरे में पड़ने की आशंका के चलते व्हाइट हाउस अभी जमीनी सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं है। वर्तमान में अमेरिकी प्रशासन की मुख्य प्राथमिकता यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को सुरक्षित रूप से फिर से खुलवाया जाए और एक ऐसा कूटनीतिक रास्ता निकाला जाए जिससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सके।



