सऊदी को मिलेंगे 48 F-35 लड़ाकू विमान, अमेरिका ने 2 लाख करोड़ की बिक्री को दी मंजूरी

रियाद। सऊदी अरब इन दिनों गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, क्योंकि यमन के हूती बागी लाल सागर से लेकर पवित्र स्थल मक्का तक लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों से निपटने के लिए रियाद ने पाकिस्तान और अमेरिका से सहायता मांगी थी। हालांकि, पाकिस्तान इस मोर्चे पर पीछे हट गया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) को सीधी सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद, अमेरिका ने एक बड़ा रक्षा सौदा करते हुए सऊदी अरब को दुनिया के सबसे आधुनिक एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान बेचने को मंजूरी दे दी है।
अद्भुत रक्षा सौदा और अरबों का आर्थिक लाभ
यह पूरी रक्षा डील लगभग 24.3 अरब डॉलर यानी करीब 2.05 लाख करोड़ रुपये की है। अमेरिका के इस कदम पर विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिकी रक्षा उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। इस सौदे के तहत सऊदी वायुसेना को 48 अत्याधुनिक एफ-35 लाइटनिंग II फाइटर जेट, 49 प्रैट एंड व्हिटनी इंजन, हाई-टेक सुरक्षा प्रणाली, संचार तंत्र और उन्नत रडार दिए जाएंगे। इसके साथ ही अमेरिकी विशेषज्ञ सऊदी पायलटों को विशेष प्रशिक्षण और लंबे समय तक तकनीकी सहायता भी प्रदान करेंगे।
पश्चिम एशिया का बदलता शक्ति संतुलन
यह रणनीतिक समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पूरा मध्य पूर्व क्षेत्र गहरे भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ हूती विद्रोही सऊदी सैन्य ठिकानों व तेल रिफाइनरियों को निशाना बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हलचल बढ़ा रखी है। इन अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों के मिलने से सऊदी अरब की वायु शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, हालांकि इस सौदे को अमेरिकी संसद की अंतिम स्वीकृति मिलना अभी बाकी है और डिलीवरी पूरी होने में कुछ साल लग सकते हैं।



