
बतौली/सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध बतौली क्षेत्र के लमगांव स्थित स्वयं प्रकट हनुमान मंदिर में एक श्रद्धालु द्वारा लगभग 11 लाख रुपये की लागत का शुद्ध सोने का मुकुट चढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। इस गुप्त दान ने इलाके में आस्था, श्रद्धा और अनूठी मिसाल की एक नई कहानी लिख दी है। मंदिर में हुए इस गुप्त और बहुमूल्य दान की चर्चा अब दूर-दूर तक फैल रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पड़ोसी जिले जशपुर के पत्थलगांव क्षेत्र के रहने वाले एक अनन्य हनुमान भक्त कुछ समय पहले अपने जीवन की गंभीर व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं से काफी परेशान थे। अपनी उलझनों से घिरा होने के कारण वह लमगांव धाम पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने सच्चे मन से बजरंगबली के दर्शन किए, संकटों से मुक्ति की गुहार लगाई और मनोकामना पूर्ण होने की मन्नत मांगी थी।
कुछ ही महीनों में दूर हुई भक्त की बड़ी समस्या
उक्त श्रद्धालु का ऐसा दृढ़ विश्वास और दावा है कि लमगांव धाम में दरबार में हाजिरी लगाने और प्रार्थना करने के कुछ ही महीनों के भीतर उनकी वर्षों पुरानी और जटिल समस्या का पूरी तरह समाधान हो गया। इस चमत्कारिक राहत के बाद उनके घर-परिवार में खुशहाली का माहौल लौट आया। अपनी इस मनोकामना के पूरा होने पर उस भक्त ने संकटमोचन हनुमान के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और आस्था व्यक्त करने का अनोखा निर्णय लिया।
हनुमान जन्मोत्सव पर गुप्त रूप से अर्पित किया स्वर्ण मुकुट
हनुमान जन्मोत्सव के पावन और पवित्र अवसर पर वह श्रद्धालु मंगलवार को चुपचाप दोबारा लमगांव मंदिर पहुँचे और स्वयं प्रकट हनुमान जी को लगभग 11 लाख रुपये मूल्य का शानदार सोने का मुकुट पूरी तरह से गुप्त रूप से अर्पित कर दिया। इस बहुमूल्य गुप्त दान के बारे में जब मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों को पता चला, तो श्री भीमसेन सेवा समिति ने उस अज्ञात और समर्पित भक्त के प्रति हृदय से आभार जताया तथा भगवान हनुमान से उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की।
लगातार बढ़ रही है लमगांव धाम की ख्याति
इस चमत्कारी घटना के सामने आने के बाद से लमगांव हनुमान मंदिर की महिमा, चमत्कार और यहाँ आने वाले भक्तों की अटूट आस्था की गूंज पूरे संभाग में तेजी से फैल रही है। स्थानीय निवासियों और जानकारों का कहना है कि यह धार्मिक धाम अब सच्चे भक्तों की आस्था और विश्वास का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है, जहाँ छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु अपनी झोली लेकर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं।



