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AI कंपनियों की वैल्यू घटने पर भारत में बढ़ सकता है पूंजी प्रवाह, बोले RBI गवर्नर

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नई दिल्ली में कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान

नई दिल्ली के कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन में कमी आने के बावजूद वैश्विक निवेश चक्र में धीमेपन के बीच भारत में पूंजी प्रवाह में वृद्धि हो सकती है। मल्होत्रा के अनुसार, हाल के वर्षों में एआई निवेश में आई तेजी ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के लिए एक मुख्य प्रेरक रही है।

एआई सेक्टर में गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए जोखिम, लेकिन भारत के लिए सकारात्मक

गवर्नर ने कहा कि एआई से जुड़े निवेश या कमाई में किसी भी प्रकार की कमी से इस सेक्टर से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों की कीमतों में बड़ा बदलाव आ सकता है। हालांकि इस तरह की गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए एक जोखिम है, लेकिन इसका भारत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि यदि विकसित देशों में एआई से जुड़े वैल्यूएशन में सुधार होता है, तो इससे भारत की ओर पूंजी के प्रवाह पर अनुकूल असर पड़ सकता है।

भारतीय इक्विटी मार्केट में सुधार और अन्य वैश्विक जोखिम

उन्होंने आगे बताया कि हाल के महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट में भी ऊंचे वैल्यूएशन से सुधार देखा गया है, जिसे उन्होंने बाजार की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उनके अनुसार, अन्य प्रमुख जोखिमों में वैश्विक स्तर पर बढ़ा हुआ कर्ज, नॉन-बैंक फाइनेंशियल सेक्टर में लीवरेज (उधार लेकर निवेश करना), प्राइवेट क्रेडिट एक्सपोजर में वृद्धि और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन कमजोरियों का मतलब यह नहीं है कि तुरंत कोई फाइनेंशियल संकट आने वाला है।

बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता और मजबूत घरेलू वित्तीय प्रणाली

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "ऐसा नहीं है कि मुझे फिलहाल संकट के कोई तुरंत संकेत दिख रहे हैं, लेकिन हमें इन तमाम जोखिमों को लेकर हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है।" देश अपने मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और बैंकों व नॉन-बैंक फाइनेंशियल संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट के दम पर एक चुनौतीपूर्ण ग्लोबल माहौल का डटकर मुकाबला कर रहा है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियों और कैपिटल फ्लो के कारण देश बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील जरूर बना हुआ है, लेकिन इसके साथ ही हमारा घरेलू फाइनेंशियल सिस्टम पूरी मजबूती भी बनाए हुए है।

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