राजकुमार लोहानी का पर्चा निरस्त, कांग्रेस के समर्थन के बावजूद नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी बारह नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुकाबले के लिए कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राजकुमार लोहानी ने आधिकारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। नामांकन की इस प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के प्रमुख विधायक हेमंत कटारे ने उम्मीदवार के प्रस्तावक की भूमिका निभाई। इस अवसर पर उनके साथ पार्टी के अन्य विधायक तथा नेतागण भी पूरी मजबूती के साथ मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि राजकुमार लोहानी राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक घोड़ा नक्कास क्षेत्र के निवासी हैं।
हरदीप सिंह पुरी का नामांकन और राजनीतिक पृष्ठभूमि
इससे पूर्व, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में शनिवार को अपना पर्चा भरा था। उस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। यह रिक्त सीट एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जिन्होंने तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने की इच्छा जताते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। वर्तमान में हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं, जिनका मौजूदा कार्यकाल इसी महीने के अंत में समाप्त होने जा रहा है।
विधानसभा के गणित से आसान है भाजपा की जीत
मध्य प्रदेश विधानसभा के संख्या बल को देखें तो यहाँ भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार होने के कारण राज्यसभा उपचुनाव में सत्ताधारी दल के प्रत्याशी की जीत पूरी तरह सुरक्षित और आसान मानी जा रही है। राज्य विधानसभा की कुल 230 सीटों में से एक विधायक के मतदान प्रक्रिया से बाहर रहने के कारण प्रभावी संख्या 229 है, और सदन के मौजूदा समीकरणों के आधार पर भाजपा उम्मीदवार का संसद के उच्च सदन में पहुँचना तय माना जा रहा है। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के उपरांत नियमानुसार उसी शाम मतगणना की जाएगी।
राजदूत से राजनेता तक का सफर
सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व हरदीप सिंह पुरी का लगभग 39 वर्षों का अत्यंत प्रतिष्ठित और लंबा राजनयिक करियर रहा है। वे वर्ष 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपनी लंबी कूटनीतिक सेवा से निवृत्त होने के पश्चात उन्होंने वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, जिसके बाद से वे केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।



