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मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने गिनाईं उपलब्धियां, तेल की कीमतों में गिरावट का किया दावा

वाशिंगटन। अमेरिका में आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से ठीक पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का बड़ा दावा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगभग दस डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस मूल्य गिरावट के पीछे मुख्य वजह ईरान के साथ संभावित सैन्य टकराव के टलने और दोनों देशों के मध्य किसी कूटनीतिक समझौते तक पहुँचने की बढ़ती उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि ईरान स्वयं जल्द से जल्द एक व्यावहारिक समझौता करने का इच्छुक है और बातचीत के जरिए शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट और अमेरिकी प्रशासन का दृष्टिकोण

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच पर साझा की गई अपनी टिप्पणी में लिखा कि तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है, जो कि अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार और जनता को अब यह विश्वास होने लगा है कि युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। इसके साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से समाधान निकलने की संभावनाओं पर गहरा सकारात्मक रुख व्यक्त किया। एक साक्षात्कार के दौरान उपराष्ट्रपति ने जानकारी दी कि कूटनीतिक वार्ताओं में कुछ सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है और अमेरिकी प्रशासन शांतिपूर्ण रास्ते की तलाश के लिए अपने प्रयासों को निरंतर जारी रखेगा।

ईरान का रुख: कूटनीति और सैन्य टकराव दोनों के लिए पूरी तैयारी

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपनी प्रतिक्रिया में दो टूक कहा कि उनका देश कूटनीतिक वार्ता और सैन्य संघर्ष, दोनों ही परिस्थितियों के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह शांतिपूर्ण समाधान का विकल्प चुनता है या फिर सैन्य कार्रवाई की राह पर आगे बढ़ता है। विदेश मंत्री ने बताया कि कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के मध्य बातचीत बहाल कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी भी दी कि यदि दोबारा सैन्य दबाव बनाने या धोखा देने का प्रयास हुआ तो ईरान कठोरतम उत्तर देगा, क्योंकि उसने अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ नए हथियारों का सफल परीक्षण भी पूरा कर लिया है।

परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध की प्रतिबद्धता और इजरायली परिदृश्य

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पूर्व में की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का पुरजोर बचाव करते हुए दोहराया कि अमेरिका तेहरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने स्वीकार किया कि भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण तेल की कीमतों में अस्थायी वृद्धि वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए चुकाई गई एक अनिवार्य कीमत थी। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन से चुनाव के पश्चात ईरान पर पुनः सैन्य दबाव बनाने पर विचार करने का आग्रह किया है, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने फिलहाल कूटनीतिक बातचीत के मार्ग को प्राथमिकता देने का संकेत देते हुए सभी सैन्य विकल्पों को भी खुला रखा है।

ऊर्जा उत्पादन में अमेरिका के दबदबे और वैश्विक संसाधनों का दावा

मध्यावधि चुनाव अभियान के दौरान दिए गए अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की विशाल ऊर्जा उत्पादन क्षमता को अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। वॉशिंगटन डीसी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि अमेरिका वर्तमान में विश्व में तेल और प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है। अपनी ऊर्जा नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और वेनेजुएला के पास संयुक्त रूप से दुनिया के लगभग आधे तेल भंडार मौजूद हैं, जो सऊदी अरब और रूस के कुल भंडारों से भी कहीं अधिक हैं। उन्होंने वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच को अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।

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