आचार संहिता से ठीक पहले 15 RAS अधिकारियों का ट्रांसफर, जानें किसे कहां मिली जिम्मेदारी

जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों की आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले भजनलाल सरकार ने प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा फेरबदल किया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, राज्य में 15 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार दोपहर 3 बजे पंचायत चुनाव के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा और आचार संहिता लागू होने से कुछ ही समय पहले की गई इस त्वरित कार्रवाई को प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आचार संहिता से ठीक पहले RAS अधिकारियों का बड़ा फेरबदल
राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा 3 अक्टूबर 2026 को जारी इस तबादला सूची में कई वरिष्ठ और फील्ड स्तर के अधिकारियों को नए दायित्व सौंपे गए हैं। सूची के अनुसार, नरेंद्र पाल सिंह को अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जैसलमेर, अनिल कुमार पूनिया को रजिस्ट्रार गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा और सुरेश चौधरी को उपायुक्त जयपुर विकास प्राधिकरण के पद पर तैनात किया गया है। इसके अलावा अवि गर्ग को रजिस्ट्रार जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर, सुरेंद्र प्रसाद को उपखंड अधिकारी नारायणपुर (कोटपुतली-बहरोड़), सुनील शर्मा-I को शासन उप सचिव सहायता विभाग जयपुर, और दिनेश शर्मा को उपखंड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी-सहरिया विकास परियोजना शाहबाद (बारां) भेजा गया है। इस फेरबदल में रवि कुमार, शिव राज मीना, कपिल कुमार, राजेश मीना, ऋतु राज शर्मा, बनवारी लाल बैरवा, सुश्री धारा और श्याम सुंदर बेनीवाल को भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के स्थानान्तरण / पदस्थापन
| क्र.सं. | अधिकारी का नाम | वर्तमान पद | नवीन पद | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | श्री नरेन्द्र पाल सिंह | अतिरिक्त आयुक्त, सी.ए.डी., आई.जी.एन.पी., बीकानेर | अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, जैसलमेर | श्री परसा राम के स्थान पर |
| 2 | श्री अनिल कुमार पूनिया | सचिव, अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर | रजिस्ट्रार, गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा | रिक्त पद पर |
| 3 | श्री सुरेश चौधरी | भू-प्रबन्ध अधिकारी, टोंक | उपायुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर | रिक्त पद पर |
| 4 | श्री अवि गर्ग | उप महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक, हनुमानगढ़-वृत्त | रजिस्ट्रार, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर | रिक्त पद पर |
| 5 | श्री सुरेन्द्र प्रसाद | उपखण्ड अधिकारी, बसेड़ी (धौलपुर) | उपखण्ड अधिकारी, नारायणपुर (कोटपुतली-बहरोड़) | श्री दिनेश शर्मा के स्थान पर |
| 6 | श्री सुनील शर्मा-I | उपखण्ड अधिकारी, अरनोद, प्रतापगढ़ | शासन उप सचिव, सहायता विभाग, जयपुर | रिक्त पद पर |
| 7 | श्री दिनेश शर्मा | उपखण्ड अधिकारी, नारायणपुर (कोटपुतली-बहरोड़) | उपखण्ड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी-सहरिया विकास परियोजना, शाहबाद (बारां) | श्री सुनील कुमार झिंगोनिया के स्थान पर |
| 8 | श्री रवि कुमार | उपखण्ड अधिकारी, हनुमानगढ़ | सहायक निदेशक, लोक सेवाएं, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग, करौली | रिक्त पद पर |
| 9 | श्री शिव राज मीना | उपखण्ड अधिकारी, हिण्डोली (बूंदी) | उपखण्ड अधिकारी, सवाईमाधोपुर | श्री मांगी लाल के स्थान पर |
| 10 | श्री कपिल कुमार | सहायक कलेक्टर, सीकर | उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजसमन्द | रिक्त पद पर |
| 11 | श्री राजेश मीना | उपखण्ड अधिकारी, आमेट (राजसमन्द) | उपखण्ड अधिकारी, मण्डावर (दौसा) | सुश्री प्रियंका बड़गुर्जर के स्थान पर |
| 12 | श्री ऋतु राज शर्मा | उपखण्ड अधिकारी, वैर (भरतपुर) | उपखण्ड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी-सहरिया विकास परियोजना, किशनगंज (बारां) | श्री हेमन्त कुमार धनधोर के स्थान पर |
| 13 | श्री बनवारी लाल बैरवा | सहायक कलेक्टर, भादरा (हनुमानगढ़) | उपखण्ड अधिकारी, फूलियाकलां (भीलवाड़ा) | श्री अरुण कुमार जैन के स्थान पर |
| 14 | सुश्री धारा | सहायक कलेक्टर, लक्ष्मणगढ़ (अलवर) | प्रोटोकॉल अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग, जयपुर | रिक्त पद पर |
| 15 | श्री श्याम सुन्दर बेनीवाल | उपखण्ड अधिकारी, बदनौर (ब्यावर) | उपखण्ड अधिकारी, हनुमानगढ़ | श्री रवि कुमार के स्थान पर |
चुनावी कमान और प्रशासनिक नियंत्रण के सियासी मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायतीराज चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने से ठीक पहले इस सूची के जारी होने के पीछे गहरी प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीतियाँ जुड़ी हैं:
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चुनाव प्रबंधन पर पकड़: बदले गए 15 अधिकारियों में से अधिकांश उपखंड अधिकारी (SDM) और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) स्तर के हैं, जो ग्रामीण चुनावों में मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाते हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी पसंद के अनुभवी अधिकारियों को तैनात कर सरकार ने चुनाव प्रक्रिया पर सीधी पकड़ मजबूत की है।
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कानूनी पेंच से बचाव: आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार बिना चुनाव आयोग की विशेष अनुमति के किसी भी फील्ड अधिकारी का तबादला नहीं कर सकती। इस कानूनी बाधा से बचने के लिए ही आचार संहिता लगने से ऐन पहले यह सूची जारी की गई।
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राजनीतिक समीकरण साधना: ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीनी पकड़ साबित करने के लिए स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों की पसंद का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि चुनाव के दौरान प्रशासनिक समन्वय बेहतर बना रहे और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही से बचा जा सके।


