मध्य प्रदेश

चीतों के लिए तैयार हो रहा तीसरा घर, नौरादेही में बढ़ेगी वन्यजीवों की रौनक

भोपाल। मध्य प्रदेश में चीतों का कुनबा अब बुंदेलखंड क्षेत्र तक फैलने जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर के बाद राज्य के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में आगामी 7 अक्टूबर को दो चीते छोड़े जाएंगे। चीता स्टीयरिंग कमेटी द्वारा नौरादेही में कुल चार चीतों को बसाने की स्वीकृति दी गई है, जिसके पहले चरण में कूनो नेशनल पार्क से नर चीता 'थोलू' और मादा चीता 'सीसीबी-3' को यहाँ लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे चीतों को रिलीज

अभियान के तहत राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद नौरादेही पहुँचकर दोनों चीतों को विशेष बाड़े में रिलीज करेंगे। जिन चीतों को यहाँ लाया जा रहा है, उनमें मादा चीता सीसीबी-3 गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ी गई चीता 'राधा' की सगी बहन है। इस महत्वपूर्ण कदम से प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

नौरादेही टाइगर रिजर्व की खासियत और सुरक्षा इंतजाम

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व 2,340 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहाँ चीतों के अनुकूल खुले जंगल और लंबे घास के मैदान मौजूद हैं।

  • सॉफ्ट रिलीज बोमा: नौरादेही लाए जा रहे चीतों को सुरक्षा और अनुकूलन की दृष्टि से सबसे पहले 439 हेक्टेयर के बड़े सॉफ्ट रिलीज बोमा में रखा जाएगा। यह बोमा आकार में भोपाल के प्रसिद्ध वन विहार नेशनल पार्क के बराबर है।

  • सुरक्षा के कड़े प्रबंध: पाँच अलग-अलग हिस्सों में बंटे इस बोमा में चीतों की पुख्ता सुरक्षा के लिए आधुनिक पावर फेंसिंग और चौबीसों घंटे सैटेलाइट व मैदानी ट्रैकिंग की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है।

बुंदेलखंड बनेगा चीतों का नया प्राकृतिक घर

गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में चीतों को बसाने की योजना पर अभी काम चल रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश ने बाजी मारते हुए नौरादेही में चीतों के स्वागत की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। नर्मदा, बेतवा और केन नदी प्रणालियों के कैचमेंट वाले इस समृद्ध क्षेत्र में चीतों की पुनर्स्थापना से बुंदेलखंड की धरती पर एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है।

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