
सारंगढ़-बिलाईगढ़: छत्तीसगढ़ के गोमर्डा अभयारण्य में जल्द ही बारनवापारा अभयारण्य से 25 काले हिरणों को लाकर खुले जंगल में आजाद किया जाएगा। वन विभाग ने इस स्थानांतरण की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। इस योजना को अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में वन मंत्री केदार कश्यप की गरिमामयी उपस्थिति में क्रियान्वित करने की तैयारी है। वर्तमान में बारनवापारा अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र में 80 से अधिक काले हिरण मौजूद हैं।
1970 के दशक में विलुप्त होने के बाद 2019 में शुरू हुई पुनर्स्थापन योजना
छत्तीसगढ़ के जंगलों में वर्ष 1970 के दशक के दौरान काले हिरण पूरी तरह विलुप्त हो गए थे और 1980 के बाद ये केवल चिड़ियाघरों तक ही सीमित रह गए थे। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 9वीं बैठक में दी गई स्वीकृति के पश्चात वर्ष 2019 में इनके पुनर्वास का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान कुल 77 काले हिरणों को लाया गया, जिनमें दिल्ली चिड़ियाघर से 50 तथा बिलासपुर के कानन पेंडारी से 27 हिरण शामिल थे।
शुरुआती चुनौतियों से उबरकर मिली बड़ी सफलता
संरक्षण के शुरुआती दौर में वन विभाग को कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दिल्ली से लाए गए कुछ हिरण नए वातावरण में ढल न पाने के कारण जीवित नहीं रह सके, वहीं निमोनिया के कारण भी करीब आठ हिरणों की मौत हो गई। इसके बाद प्रबंधन ने रणनीति बदली और बिलासपुर से लाए गए हिरणों को बाड़े में अनुकूलन का पूरा समय दिया, जिससे वे प्राकृतिक परिवेश में ढलने में सफल रहे।
छत्तीसगढ़ में 200 के पार पहुँची संख्या, 'मन की बात' में भी हुआ जिक्र
निरंतर देखभाल, पौष्टिक भोजन और अनुकूल माहौल के दम पर राज्य में काले हिरणों का कुनबा बढ़कर अब लगभग 200 तक पहुँच गया है। इस उपलब्धि की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में की थी। संख्या में बढ़ोतरी के बाद बारनवापारा के खुले जंगल में चरणबद्ध तरीके से 60 काले हिरण छोड़े जा चुके हैं, जिनमें पहली बार फरवरी 2022 में 14 तथा बाद में 2024 और फरवरी 2026 में 34 अन्य हिरण मुक्त किए गए थे।
अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में गोमर्डा में होगी नए मेहमानों की एंट्री
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एवं वनबल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के अनुसार, गोमर्डा अभयारण्य में 25 काले हिरणों के विस्थापन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विभागीय मंत्री की अंतिम सहमति मिलते ही अक्तूबर के पहले सप्ताह में इन्हें नए प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा। करीब पचास वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात प्राकृतिक वातावरण में काले हिरणों का यह पुनर्वास बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है।



