बारिश का इंतजार जारी, देश में सामान्य से 11 फीसदी कम बरसा मानसून

नई दिल्ली: देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। जून में हुई भारी कमी के बाद जुलाई में बारिश की स्थिति में कुछ सुधार जरूर आया, लेकिन अब भी देशभर में कुल मानसूनी बारिश में लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट बनी हुई है। इसके बावजूद, वर्तमान मौसमी परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर नहीं पड़ेगी। पश्चिमी और मध्य भारत में कमजोर पड़ रहे निम्न दबाव के क्षेत्र और पूर्वी भारत में बढ़ी नई गतिविधियों के चलते अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहने की संभावना है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून ट्रफ के पूरी तरह सक्रिय रहने से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के साथ-साथ बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।
पश्चिम से पूर्व की ओर खिसका मानसून का केंद्र
हाल ही में बंगाल की खाड़ी से उठे डिप्रेशन ने मध्य और पश्चिमी भारत में अच्छी बारिश कराई थी। यह सिस्टम कमजोर पड़कर राजस्थान की ओर बढ़ गया है। आमतौर पर ऐसे सिस्टम के शांत होने पर बारिश में ब्रेक लगता है, लेकिन इस बार पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में बनी नई मौसमी गतिविधियों ने मानसून की रफ्तार धीमी नहीं होने दी। अब पूर्वी भारत इस मानसूनी दौर का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
कृषि के लिए राहत, पर बाढ़ और भूस्खलन की चुनौती
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में जारी बारिश धान की फसल के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है। इससे जलाशयों के जलस्तर और बिजली उत्पादन में भी सुधार होगा। हालांकि, असम सहित निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और शहरी इलाकों में जलभराव, यातायात बाधा तथा बिजली कटौती जैसी समस्याएं आ सकती हैं।
उत्तर-पश्चिम भारत में भी सुधरेंगे हालात
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून ट्रफ के धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर खिसकने की संभावना है। इससे आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है। हालांकि अगस्त और सितंबर के पूरे चक्र में overall बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान है, लेकिन अगस्त का शुरुआती दौर देश के बड़े हिस्से के लिए राहत भरा रहेगा।



