मध्य प्रदेश

भोपाल की बदलेगी तस्वीर, मकान और दुकानों के साइनबोर्ड एक ही रंग में नजर आएंगे

भोपाल। जोधपुर की 'ब्लू सिटी' वाली ऐतिहासिक पहचान की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पुराने शहर को भी एक नया, विशिष्ट और सुंदर स्वरूप प्रदान करने की बड़ी तैयारी की जा रही है। इस योजना के तहत जल्द ही पुराने शहर के तमाम मकानों और व्यावसायिक दुकानों के साइनबोर्ड एक ही जैसे रंग, आकार और तय डिजाइन में नजर आएंगे। इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) को एक औपचारिक प्रस्ताव भी भेज दिया गया है, जिसका मुख्य मकसद आने वाले नए मास्टर प्लान में इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से शामिल कर लागू करना है ताकि इस ऐतिहासिक क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक 'हेरिटेज सिटी' के तौर पर स्थापित किया जा सके।

नंबर-5 बाजार में एकरूपता और मास्टर प्लान 2047 पर आपत्तियां

इससे पहले भोपाल के लोकप्रिय नंबर-5 बाजार को भी एक समान साइनबोर्ड व्यवस्था के जरिए सुव्यवस्थित करने की योजना बनाई गई थी। वर्तमान में शासन की रीडेंसीफिकेशन पॉलिसी के अंतर्गत हाउसिंग बोर्ड इस बाजार का कायाकल्प करने में जुटा हुआ है, जहां आवासीय और व्यावसायिक परिसरों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि निर्माण पूरा होते ही इस पूरे परिसर को एक नया और एक जैसा लुक मिल जाएगा। दूसरी तरफ, मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 को लेकर नागरिकों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। महज 25 दिनों के भीतर ही इस पर दर्ज आपत्तियों का आंकड़ा 1732 को पार कर चुका है, जो पिछले कई वर्षों के मुकाबले एक नया रिकॉर्ड है। शहर की लगभग 80 कॉलोनियों के निवासियों ने मिलकर एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे अलग-अलग नामों से दर्ज कराया जा रहा है।

ऐतिहासिक धरोहरों को निखारने और पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल

मौजूदा समय में पुराने शहर की संकरी गलियों, पारंपरिक बाजारों और रियासतकालीन इमारतों पर विभिन्न रंगों, आकारों और भड़कीले डिजाइनों के बोर्ड लगे हुए हैं, जिससे न केवल क्षेत्र की सुंदरता पर असर पड़ता है बल्कि उसकी प्राचीन भव्यता भी छिप जाती है। एक जैसे साइनबोर्ड लगने से पूरे बाजार में एकरूपता और आकर्षण पैदा होगा। जोधपुर की तर्ज पर भोपाल का पुराना शहर भी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा। हालांकि, अतीत में चौक बाजार को हेरिटेज रूप देने के लिए शुरू किए गए काम आधे-अधूरे ही रह गए थे और बिजली के तारों का मकड़जाल आज भी जस का तस है, लेकिन इस नई और व्यापक प्रशासनिक पहल से पुराने शहर के दिन बहुरने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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