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भारत दौरे पर शी जिनपिंग की अटकलें तेज, क्या फिर पटरी पर आएंगे दोनों देशों के संबंध?

नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली में आगामी सितंबर माह में प्रतिष्ठित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन होने जा रहा है, जिसमें दुनियाभर के कई दिग्गज वैश्विक नेता हिस्सा लेंगे। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन को लेकर भारत की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं और विदेश मंत्रालय द्वारा इसका आधिकारिक शेड्यूल भी पहले ही जारी किया जा चुका है, जिसके तहत यह कार्यक्रम 12 से 13 सितंबर के बीच आयोजित किया जाएगा। इस वैश्विक मंच पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, जिससे इस आयोजन का कूटनीतिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

छह साल बाद भारत आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, गलवान विवाद के बाद होगा पहला दौरा

इस आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर सबसे बड़ा और कूटनीतिक रूप से चर्चा का विषय यह है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सकते हैं। यदि उनका यह दौरा अंतिम रूप से तय हो जाता है, तो यह पिछले छह वर्षों में उनका पहला भारत दौरा होगा। इसके साथ ही यह वर्ष 2020 की गलवान घाटी की दुर्भाग्यपूर्ण झड़प के बाद चीन के शीर्ष नेता का भारत की धरती पर पहला कदम होगा, जिस पर न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

गलवान झड़प के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं भारत-चीन रिश्ते, वैश्विक राजनीति पर पड़ता है असर

गौरतलब है कि एक समय भारत और लद्दाख की सीमा पर गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों एशियाई दिग्गजों के द्विपक्षीय संबंधों में भारी तकरार और कड़वाहट आ गई थी, जिसके जवाब में भारत सरकार ने चीन के खिलाफ कई कड़े और सख्त प्रतिबंधात्मक कदम उठाए थे। भारत और चीन के आपसी संबंध केवल दो देशों की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रत्यक्ष और दूरगामी प्रभाव पूरे एशिया महाद्वीप तथा वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ता है, यही वजह है कि दोनों देशों के बीच होने वाली हर कूटनीतिक हलचल पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पैनी नजर रहती है।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार, चीनी विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन को सफल बनाने का दिया भरोसा

हालांकि अभी तक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस भारत यात्रा को लेकर बीजिंग की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि बहुत जल्द इस पर से पूरी तरह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि हाल ही में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान यह बयान दिया है कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है, और चीन ने इस आगामी कार्यक्रम को पूरी तरह सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का पूरा भरोसा दिया है।

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