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अच्छे स्वास्थ्य का संदेश लेकर पीएम मोदी ने साझा किया प्रेरक सुभाषित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक प्रेरक संदेश के माध्यम से उत्तम स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए जीवन में अच्छे स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

स्वास्थ्य ही जीवन के चारों पुरुषार्थों का आधार

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए संस्कृत श्लोक—"सुखोपविष्टास्ते तत्र पुण्यां चक्रुः कथामिमाम्। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्।।"—के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का एकमात्र और उत्तम मूल आरोग्य यानी अच्छा स्वास्थ्य ही है। यह प्रसंग उस काल का स्मरण कराता है जब प्राचीन काल में महर्षि पुनर्वसु आत्रेय और उनके ज्ञानी शिष्य किसी शांत एवं पवित्र स्थल पर एकत्र हुए थे और उन्होंने मानव जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य तथा उसकी प्राप्ति की अनिवार्य शर्तों पर गहन विचार-विमर्श किया था।

चरकसंहिता के प्रसंग और प्राचीन ज्ञान

यह संदर्भ प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रंथ 'चरकसंहिता' के सूत्रस्थान के प्रथम अध्याय के 15वें श्लोक से लिया गया है। चर्चा के दौरान महर्षियों ने इस बात पर विशेष बल दिया था कि बिना स्वस्थ शरीर के जीवन के किसी भी बड़े लक्ष्य को साधना असंभव है। भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के चार मुख्य लक्ष्य तय किए गए हैं, किंतु मनुष्य का शरीर यदि अस्वस्थ है, तो वह इनमें से एक भी कार्य सुचारू रूप से पूरा नहीं कर सकता।

अस्वस्थता से बाधित होते हैं जीवन के सभी लक्ष्य

यदि शरीर रुग्ण है, तो व्यक्ति पूजा-पाठ, सेवा या परोपकार जैसे धर्म से जुड़े कार्य ठीक से नहीं कर सकता। बीमारी की स्थिति में आजीविका चलाना और धन कमाना कठिन हो जाता है, जिससे अर्थ की प्राप्ति रुक जाती है। इसके अलावा, एक रोगी व्यक्ति जीवन के भौतिक सुखों यानी काम का आनंद नहीं उठा सकता, और जब तन व मन दोनों ही पीड़ा से घिरे हों, तो ध्यान या आत्मज्ञान के मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्त करना भी असंभव हो जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य को वह पहली सीढ़ी या मजबूत जड़ माना गया है, जिस पर टिककर मनुष्य अपने जीवन के सभी महत्वपूर्ण लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकता है।

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