मध्य प्रदेश

खनन कंपनियों को बड़ा झटका, 234 करोड़ रुपये की वसूली के खिलाफ याचिका खारिज

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिहोरा स्थित लौह अयस्क खदानों में स्वीकृत सीमा से अधिक अवैध खनन के मामले में जारी 234 करोड़ रुपये के वसूली नोटिस को चुनौती देने वाली खनन कंपनी 'मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन' की याचिका खारिज कर दी है।

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि यह प्रकरण वर्तमान में सक्षम प्राधिकारी यानी जिला कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए याचिकाकर्ता कंपनी को वहीं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहिए। अदालत ने कलेक्टर को 4 माह के भीतर मामले की विधिवत सुनवाई कर अंतिम निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र में कंपनी को 20.002 हेक्टेयर की टिकरिया खदान और 11.578 एकड़ की प्रतापपुर लौह अयस्क खदान का पट्टा आवंटित किया गया था। आरोप है कि वर्ष 2004 से 2017 के बीच पर्यावरण और खनन अनुमतियों का उल्लंघन कर अत्यधिक मात्रा में अयस्क निकाला गया।

  • जांच समिति की रिपोर्ट: शिकायतों की जांच के लिए 23 अप्रैल 2025 को एक विशेष जांच समिति गठित की गई थी।

  • वसूली का प्रस्ताव: समिति की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को टिकरिया खदान पर ₹113.83 करोड़ और प्रतापपुर खदान पर ₹120.69 करोड़ (कुल ₹234.52 करोड़) की वसूली का नोटिस जारी किया था।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

  • कंपनी का पक्ष: खनन कंपनी ने तर्क दिया कि जिस जांच समिति के प्रतिवेदन पर यह कार्रवाई की जा रही है, उसका गठन किसी वैध कानूनी प्रावधान के तहत नहीं हुआ था, इसलिए उसके आधार पर जुर्माना वसूलना अनुचित है।

  • राज्य सरकार का पक्ष: राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता पीयूष जैन ने अदालत को बताया कि जिला प्रशासन ने कंपनी को पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया है और मामला फिलहाल लंबित है।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि कलेक्टर किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र निर्णय लेंगे। यदि अंतिम फैसले से कंपनी असंतुष्ट रहती है, तो उसके पास नियमानुसार वैधानिक अपील (Appeals) का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

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