उत्तर प्रदेशराज्य

इंडोनेशिया से लौटे गैंगस्टर ‘बिल्ला’ मामले में GRP सिपाही गिरफ्तार, फर्जी सत्यापन का आरोप

गोरखपुर| दिल्ली और पंजाब के कुख्यात गैंगस्टरों सहित 22 लोगों के जालसाजी से फर्जी पासपोर्ट बनवाने के बड़े मामले में पुलिस ने जीआरपी में तैनात कांस्टेबल शशिकांत यादव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि गोरखपुर के गोरखनाथ थाने में पदस्थापना के दौरान उसने फर्जी नाम और पते पर तैयार किए गए कागजातों का पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) किया था। फिलहाल पुलिस इस गिरोह से जुड़े बाकी चेहरों की तलाश कर रही है।

जांच में 22 पासपोर्ट निकले पूरी तरह फर्जी

गाजीपुर जिले के लोनहरा स्थित नसीरपुर कुसुम गाँव का रहने वाला शशिकांत यादव वर्तमान में गोरखपुर जीआरपी अनुभाग दफ्तर में पदस्थ है। पुलिस पड़ताल के अनुसार, उसके द्वारा वेरिफाई किए गए फर्जी दस्तावेजों की मदद से दर्जनों लोगों ने पासपोर्ट हासिल कर लिए। शशिकांत के कार्यकाल के दौरान लगभग 45 लोगों के पासपोर्ट जारी हुए थे, जिनमें से 22 पासपोर्ट पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी पाए गए हैं। इन सभी में झूठे नाम, पते या कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था।

इंडोनेशिया से डिपोर्ट हुए गैंगस्टर का भी बना था फर्जी पासपोर्ट

मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा पंजाब के अमृतसर निवासी गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला को लेकर हुआ। अमृतसर के मेहता थाना क्षेत्र निवासी जोबनजीत ने दीपू सिंह नाम से गोरखपुर के लच्छीपुर क्षेत्र के पते पर जाली दस्तावेज बनवाकर पासपोर्ट हासिल कर लिया था। इसी पासपोर्ट के बल पर वह विदेश भाग गया था, लेकिन इंडोनेशिया से डिपोर्ट होने के बाद उसकी पोल खुल गई।

नाम-पता बदलकर पासपोर्ट बनवाने वाले अन्य अपराधी

पड़ताल में दो अन्य शातिर अपराधियों के नाम भी सामने आए हैं:

  • अमृतसर के रहने वाले दयाल मल्ल ने गोरखपुर के लच्छीपुर पते पर साल 2024 में जाली पासपोर्ट बनवाया था, जिसे बाद में दिल्ली हवाई अड्डे पर दबोच लिया गया।

  • दिल्ली के शालीमार बाग निवासी हरसिमरन सिंह उर्फ बादल ने राजेश सिंह के छद्म नाम से इसी पते पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। उसे दिसंबर 2025 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था।

डेढ़ साल के भीतर बिछाया फर्जीवाड़े का जाल

आरोपी सिपाही शशिकांत यादव अगस्त 2023 में गोरखनाथ थाने में तैनात हुआ था और महज डेढ़ साल के भीतर ही उसने यह अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया। फरवरी 2025 में उसे सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेजा गया था और करीब छह महीने पहले उसका ट्रांसफर जीआरपी में हुआ था। वर्ष 2018 बैच का यह सिपाही अब सलाखों के पीछे है।

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