सीएम हिमंत का दावा- घुसपैठियों के नाम हटने से विपक्ष परेशान, राहुल गांधी पर उठाए सवाल

शिमला। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा की अगुवाई की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध मात्र इसलिए कर रहे हैं ताकि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें। इस विशाल पदयात्रा में असम के मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद सुरेश कश्यप सहित भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। सरमा ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से अवैध रूप से दर्ज नामों को हटाए जाने से कांग्रेस नेतृत्व विचलित है और वह घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए यह पूरा राजनीतिक प्रपंच रच रहा है, परंतु देश की जनता ऐसा कदापि स्वीकार नहीं करेगी।
असम-बंगाल का उदाहरण और एसआईआर की आवश्यकता पर बल
पदयात्रा के उपरांत जनसमूह को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने असम और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ की गंभीर समस्या को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में अवैध प्रवासियों का मुद्दा देश की संसद से लेकर उच्चतम न्यायालय तक में स्वीकार किया जा चुका है। ऐसे में यदि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण नहीं किया जाएगा तो अवैध घुसपैठियों के नाम सूची से बाहर कैसे निकाले जाएंगे। सरमा ने कहा कि इस विशेष अभियान के जरिए ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने और अनुचित नामों को हटाने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल करते हुए पूछा कि क्या एसआईआर का विरोध करने वाले नेता हिमाचल प्रदेश और केरल के चुनावों सहित रायबरेली के संसदीय चुनाव को भी रद्द करने की मांग करेंगे।
चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस के दोहरे रवैये की आलोचना
भाजपा नेता ने चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैये की तीव्र आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जहां स्वयं चुनाव जीतकर सत्ता में आती है, वहां की निर्वाचन प्रणाली को सही मानती है, जबकि भाजपा शासित राज्यों में उसे चुनावी गड़बड़ियां नजर आने लगती हैं। सरमा ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस को देश की चुनाव प्रणाली पर भरोसा नहीं है तो उसे सबसे पहले अपने राज्यों की सरकारों से त्यागपत्र देना चाहिए। उन्होंने पुनः स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया का विरोध केवल और केवल अवैध घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में सुरक्षित रखने का एक नाकाम प्रयास है, जबकि भाजपा चुनाव आयोग और देश के आम नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी है।



