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बांग्लादेश में चिन्मय दास को राहत, पीएम के न्योते के बाद मिली बेल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि तारिक रहमान इस यात्रा पर भारत आएंगे या नहीं। इसी बीच, ढाका से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सामाजिक विकास सामने आया है, जिसे दोनों देशों के हिंदू समुदाय के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

संत चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में मिली जमानत

बांग्लादेश हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को उनके खिलाफ दर्ज चार मामलों में से दो में राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। बचाव पक्ष के वकीलों के अनुसार, जिन मामलों में जमानत मिली है, वे हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा डालने और तोड़फोड़ से जुड़े थे। अदालत ने शेष दो अन्य मामलों में दायर जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।

राष्ट्रीय ध्वज अपमान के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

'बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत' के प्रवक्ता और पूर्व इस्कॉन नेता चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के कथित अनादर का आरोप लगाया गया था। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में 27 नवंबर को चट्टोग्राम अदालत परिसर के बाहर समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें भी हुई थीं। चिन्मय दास लंबे समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों की वकालत करते रहे हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग

चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में सनातनी और अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने सरकार के समक्ष अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने, मामलों की त्वरित सुनवाई हेतु ट्रिब्यूनल का गठन करने और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए पृथक मंत्रालय बनाने जैसी प्रमुख मांगें रखी थीं। उनकी आंशिक रिहाई को समर्थकों द्वारा बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि सभी की निगाहें अब 16 अगस्त को होने वाली अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं।

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