मध्य प्रदेश

3.5 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला, अपर कलेक्टर के रीडर को बड़ा झटका

टीकमगढ़| मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सरकारी जमीनों पर फर्जी तरीकों से नामांतरण कराकर अवैध कब्जा करने के मामले में जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। जिला कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने गहन जाँच के उपरांत सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर के रीडर रहे शंकर प्रसाद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी, माता और पुत्र के नाम पर अवैध रूप से दर्ज की गई 3.5 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का नामांतरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है और उस पूरी जमीन को पुनः शासकीय अभिलेखों में दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग कर सरकारी जमीन पर किया था कब्जा

प्रशासनिक जाँच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने शासकीय पद और उच्च प्रशासनिक रसूख का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न सरकारी जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे तथा सभी स्थापित नियमों की अनदेखी कर अपने व अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज करवा लिया था। इन विवादित जमीनों में ग्राम उत्तरी कर्री और मोगनगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कई मूल्यवान शासकीय भूमियाँ शामिल हैं। शुरुआती जाँच में यह भी पाया गया कि इनमें से कुछ भूमियाँ वर्ष 1969-70 से ही आधिकारिक रूप से शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज चली आ रही थीं, जिन्हें बाद में सुनियोजित तरीके से फर्जी आदेशों और अवैध नामांतरण के माध्यम से निजी स्वायत्तता के अधीन करा लिया गया था।

पूर्व के सभी अवैध आदेशों को मानते हुए किया गया निरस्त

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन समय में एक नायब तहसीलदार द्वारा अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ये तमाम आदेश पारित किए गए थे। इसके अलावा, कई मामलों में तो सरकारी भूमि के बदले निजी भूमि की अदला-बदली (एक्सचेंज) भी प्रचलित नियमों के पूर्णतः विपरीत जाकर कर दी गई थी। विस्तृत जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि लगभग 1.126 हेक्टेयर सरकारी भूमि सबसे पहले श्रीवास्तव की माता के नाम पर दर्ज कराई गई, और उसी के आधार पर दूसरी बेशकीमती शासकीय भूमि उनके पुत्र राहुल श्रीवास्तव के नाम पर हस्तांतरित करवा ली गई। प्रशासन ने इन सभी पूर्ववर्ती आदेशों को पूरी तरह से अवैध और कानून के विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया है।

शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी व्यापक प्रशासनिक जाँच

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय शिकायतकर्ता ने प्रशासन के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि एक लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) के पद पर रहते हुए शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया है। जाँच प्रक्रिया के दौरान नियमानुसार दोनों पक्षों को अपना-पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया गया। राजस्व विभाग के पुराने दस्तावेजों और अभिलेखों के बार-बार परीक्षण के बाद प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि नामांतरण की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से फर्जी और नियमों के खिलाफ थी।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से हड़कंप

कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय द्वारा सभी विवादित और फर्जी आदेशों को निरस्त करते हुए संबंधित जमीनों को वापस सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के इस सख्त कदम से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब जिले भर में सरकारी भूमियों पर हुए अन्य कथित अवैध नामांतरण और कब्जों का मामला भी जोर पकड़ने लगा है। यह माना जा रहा है कि इस कड़े प्रशासनिक कदम के बाद अब अन्य ऐसे मामलों की भी उच्च स्तरीय जाँच तेज हो सकती है, जिससे सरकारी संपत्तियों और जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एक व्यापक और निर्णायक अभियान का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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