हिमंत सरमा के परिवार को जान का खतरा! कोर्ट जाने की तैयारी, जुबीन गर्ग केस से क्या है संबंध?

गुवाहाटी। असम के सुप्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का प्रकरण अब एक अत्यंत गंभीर राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि यदि इस मामले के दो मुख्य आरोपियों को अदालत से जमानत मिलती है, तो उनके निजी आवास का घेराव करने की खुली चेतावनी दी गई है। मुख्यमंत्री ने इस प्रकार की धमकियों को अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सीधा व गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का कानून विभाग इस पूरे घटनाक्रम और धमकी से जुड़ी जानकारियों को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार विरोध प्रदर्शन के नाम पर उनके सरकारी दफ्तर के बजाय उनके निजी निवास को निशाना बनाने की बात कहना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
न्यायिक प्रक्रिया और विधायक के नेतृत्व वाली समिति की चेतावनी
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका के प्रत्येक आदेश का पूरी तरह सम्मान करती है और अदालतें अपना कार्य निष्पक्षता से कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्थानीय विधायक के नेतृत्व वाले संगठन द्वारा दी गई यह धमकी प्रदेश में सामाजिक अशांति उत्पन्न करने का प्रयास है। दरअसल, जुबीन गर्ग न्याय समिति, जिसके प्रमुख रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई हैं, ने चेतावनी जारी की थी कि यदि मामले के प्रमुख आरोपी श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को जमानत मिलती है अथवा सरकार अदालत में उनकी जमानत का प्रभावी विरोध करने में विफल रहती है, तो मुख्यमंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। ज्ञात हो कि इन दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आगामी 30 नवंबर को शीर्ष अदालत में सुनवाई होना निर्धारित है।
परिवार की सुरक्षा और गवाहों के बयानों पर मुख्यमंत्री का पक्ष
मुख्यमंत्री सरमा ने जोर देकर कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के घर के बाहर प्रदर्शन करने की धमकी देना सामान्य विरोध की श्रेणी से बाहर है और यह परिवार की सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष संकट पैदा करता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे अदालत की वैधानिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने के बजाय मामले से जुड़े तथ्यों का अध्ययन करें। पूर्व में जमानत पा चुके अन्य आरोपियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा गायिका अमृतप्रभा महंत और संदीपन गर्ग को जमानत दी जा चुकी है। उच्च न्यायालय के आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान 160 गवाहों ने अमृतप्रभा का नाम नहीं लिया था, जबकि विशेष जांच दल की शुरुआती रिपोर्ट में उनका जिक्र था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के विरोधाभास के संबंध में सवाल गवाहों से पूछे जाने चाहिए, न कि सरकार या मुख्यमंत्री से।
मामले की पृष्ठभूमि और आगामी कानूनी कार्यवाही
उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने गए गायक जुबीन गर्ग की समुद्र में तैरते समय दुखद मृत्यु हो गई थी। यद्यपि सिंगापुर पुलिस की शुरुआती जांच में किसी साजिश की पुष्टि नहीं हुई थी, किंतु असम में इस मामले की गहन प्रशासनिक और न्यायिक जांच निरंतर जारी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आयोजक श्यामकानु महंत, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, निलंबित पुलिस अधिकारी संदीपन गर्ग, अमृतप्रभा महंत, शेखर ज्योति गोस्वामी तथा दो निजी सुरक्षा अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं। राज्य सरकार अब आगामी 30 नवंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान इस पूरी कानूनी और सुरक्षात्मक स्थिति से अदालत को अवगत कराएगी।



