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पायलटों की थकान का मुद्दा उठा, फेडरेशन ने डीजीसीए को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। देश में विमानन सुरक्षा और पायलटों की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए से मांग की है कि पायलटों के ड्यूटी समय और आराम से जुड़े संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों में दी गई तमाम अस्थायी छूटों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि सुरक्षा मानकों में बार-बार ढील दिए जाने के कारण पायलटों में अत्यधिक मानसिक और शारीरिक थकान की समस्या बढ़ती जा रही है, जो सीधे तौर पर विमान यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

विमानन नियामक की रियायतों और समयसीमा पर खड़े किए सवाल

पायलटों की प्रतिनिधि संस्था एफआईपी ने डीजीसीए से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किन आधारों पर सुरक्षा नियमों में दी गई छूट की अवधि को आगे बढ़ाया जा रहा है। संगठन ने मार्च 2027 तक बढ़ाई गई तमाम रियायतों को तुरंत समाप्त कर संशोधित एफडीटीएल नियमों को पूरी तरह से लागू करने पर बल दिया है। गौरतलब है कि एफडीटीएल नियमों का मुख्य उद्देश्य उड़ान के दौरान अधिकतम ड्यूटी अवधि, लगातार रात्रि कालीन सेवाएं और दो उड़ानों के बीच आवश्यक आराम का समय तय करना है ताकि पायलट पूरी तरह मानसिक रूप से सतर्क रहकर विमान का संचालन कर सकें।

एयरलाइंस कंपनियों द्वारा पायलटों की कमी के दावों पर सवाल

एयरलाइंस कंपनियों की ओर से पायलटों की किल्लत का हवाला देकर नियमों में रियायत मांगने के तर्कों पर भी संगठन ने कड़ा ऐतराज जताया है। एफआईपी का कहना है कि सरकार को किसी भी प्रकार की छूट देने से पहले यह गहन जांच करनी चाहिए कि एयरलाइंस ने अपने ड्यूटी रोस्टर को सुधारने और नए पायलटों की भर्ती के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। पूर्व में सरकार द्वारा भी स्पष्ट किया जा चुका है कि देश में कुल मिलाकर पायलटों की कोई कमी नहीं है, केवल कुछ विशेष विमानों के लिए अनुभवी कमांडरों की सीमित आवश्यकता है जिसे पूरा करने के वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं।

ड्यूटी रिकॉर्ड के निष्पक्ष ऑडिट और संयुक्त बैठक की मांग

पायलट संगठन ने सरकार से मांग की है कि सभी एयरलाइंस कंपनियों के ड्यूटी रोस्टर, उड़ान अवधि और पायलटों को मिलने वाले आराम के रिकॉर्ड का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही थकान से जुड़ी पूर्व रिपोर्टों का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पायलटों को नियमानुसार पूरा आराम दिया जा रहा है या नहीं। एफआईपी ने इस गंभीर विषय पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, एयरलाइंस प्रबंधनों और पायलट प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया है ताकि सुरक्षा से समझौता किए बिना उड़ान संचालन को सुचारू बनाया जा सके।

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