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आंखों में जलन को न करें नजरअंदाज, मोबाइल इस्तेमाल के दौरान हो सकती हैं ये 5 गलतियां

सुबह की शुरुआत के साथ ही आंखों में लगातार थकान महसूस होना, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर काम करते समय जलन का बढ़ना और धूप या धूल से लौटने पर आंखों का लाल हो जाना—क्या आपने भी इन तमाम परेशानियों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मान लिया है? आज के डिजिटल युग में स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ना आम बात हो गई है, लेकिन हर बार इसके लिए केवल मोबाइल या लैपटॉप ही जिम्मेदार नहीं होता। कई बार आंखों का सूखापन, किसी प्रकार की एलर्जी, संक्रमण, गलत नंबर का चश्मा या कुछ खास दवाएं भी इन समस्याओं की मुख्य वजह बन सकती हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी आंखों द्वारा दिए जाने वाले इन संकेतों को समय रहते समझें और उनकी उचित देखभाल करें।

आंखों का सूखापन और नमी घटने के प्रमुख कारण

आंखों में होने वाले दर्द, खुजली और चुभन की सबसे आम वजहों में 'आई ड्राइनेस' यानी सूखापन शामिल है। हमारी आंखों की सतह पर आंसुओं की एक पतली परत होती है जो उन्हें प्राकृतिक रूप से नम और सुरक्षित रखती है। जब ये आंसू कम बनने लगते हैं या बहुत जल्दी सूख जाते हैं, तो परेशानी शुरू हो जाती है। पलकों की तेल ग्रंथियों का बंद होना भी इस समस्या को काफी हद तक बढ़ा देता है। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, थायरॉयड, शरीर में विटामिन ए की कमी और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसका कारण बन सकती हैं, जिससे बचाव के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी है।

एलर्जी, संक्रमण और बाहरी कारकों का प्रभाव

वातावरण में मौजूद धूल-कण, फूलों के परागकण और पालतू जानवरों के बाल अक्सर आंखों में गंभीर एलर्जी पैदा कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप आंखों में तेज खुजली, जलन, लालिमा और लगातार पानी आने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो मौसम बदलने के साथ और अधिक बढ़ जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के मामले में आंखें लाल होने के साथ-साथ उनमें चुभन और पानी आने जैसे लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में अपनी आंखों को बार-बार छूने या रगड़ने से पूरी तरह बचना चाहिए और तुरंत किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

गलत चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस और दवाओं के दुष्प्रभाव

कई बार पुराने या गलत नंबर के चश्मे के इस्तेमाल से आंखों पर अतिरिक्त जोर पड़ता है, जिसकी वजह से गंभीर थकान और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहने रहना या उनकी साफ-सफाई में बरती गई लापरवाही भी आंखों के सूखेपन और खुजली को बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त, एलर्जी, डिप्रेशन और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के इलाज में उपयोग होने वाली कुछ दवाएं भी आंखों में dryness पैदा कर सकती हैं। अपर्याप्त नींद, धूम्रपान और खराब गुणवत्ता वाले आई-मेकअप का प्रयोग भी इन परेशानियों को और गंभीर बना देता है, इसलिए आंखों की सेहत के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

स्वस्थ खानपान और नेत्र विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह

आंखों की रोशनी और उनकी लंबी उम्र तक सेहत बनाए रखने के लिए अपने दैनिक आहार में विटामिन ए और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। गाजर और पपीता विटामिन ए के बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं, जबकि अखरोट और अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रदान करते हैं। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी आंखों के लिए बेहद उपयोगी होता है। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग नरूला सलाह देते हैं कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, सोते समय चेहरे को सीधे एसी या पंखे की तेज हवा से बचाएं और दिन में दो बार साफ व ठंडे पानी से आंखें धोएं। तेज धूप और धूल भरी आंधियों से बचाव के लिए हमेशा यूवी प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस का उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर फौरन चिकित्सक की सलाह लें।

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