छत्तीसगढ़राज्य

पितृपक्ष पर गूंजे पितरों के जयकारे, श्रद्धालुओं ने किया तर्पण-पिंडदान

बिलासपुर। पितृपक्ष के पावन पर्व के आरंभ होने के साथ ही शहर के विभिन्न घाटों और धार्मिक स्थलों पर दिवंगत पूर्वजों के प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था का सुंदर माहौल देखने को मिल रहा है। पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मशांति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों का एक व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत है:

घाटों पर उमड़े श्रद्धालु, हुआ तर्पण व पिंडदान

  • प्रातःकाल से आरंभ हुए अनुष्ठान: पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही सुबह-सवेरे बड़ी संख्या में लोग अपने दिवंगत परिजनों के निमित्त धार्मिक कर्मकांड संपन्न कराने के लिए शहर के प्रमुख घाटों पर पहुंचने लगे।

  • विधि-विधान से पूजा: पुरोहितों की उपस्थिति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात तिल, जल, कुश और चावल अर्पित कर विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया।

  • कामना: इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं।

पूजन सामग्री और विशेष अनुष्ठान

  • सामग्री का उपयोग: तर्पण और पिंडदान की पूरी प्रक्रिया के दौरान काले तिल, शुद्ध जल, कुश, चावल और अन्य आवश्यक पूजन सामग्रियों का समर्पित भाव से उपयोग किया गया।

  • दिवंगतों का स्मरण: लोगों ने अपने माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य दिवंगत परिजनों के निमित्त पिंडदान किया। इसके अलावा, जिन परिवारों में किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई थी, उनकी आत्मशांति के लिए भी विशेष रूप से तर्पण किया गया।

घरों में श्राद्ध और दान-पुण्य की परंपरा

केवल घाटों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अनेक परिवारों ने अपने घरों पर भी श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म संपन्न किए।

  • पितरों की स्मृति में सात्विक भोजन तैयार कर उन्हें भोग के रूप में अर्पित किया गया।

  • परंपरा का निर्वहन करते हुए जरूरतमंदों को भोजन कराया गया और खुले दिल से दान-पुण्य किया गया। लोगों का मानना है कि यह समय अपने पूर्वजों को याद करने का सबसे बड़ा अवसर है।

अवधि और सर्वपितृ अमावस्या

  • इस वर्ष पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।

  • इस पूरे पखवाड़े लोग अपनी सुविधा और पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध व तर्पण करेंगे।

  • पखवाड़े का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा, जो उन सभी अज्ञात या जिनकी तिथि ज्ञात न हो, ऐसे पूर्वजों के श्राद्ध के लिए विशेष महत्व रखती है।

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