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राष्ट्रपति भवन में बढ़ा महिला शक्ति का कद, मेजर नव्या शेखावत बनीं पहली महिला आर्मी ADC

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले औपचारिक व आधिकारिक आयोजकों के दौरान राष्ट्रपति के साथ उपस्थित रहने वाले सैन्य अधिकारियों में मेजर नव्या शेखावत ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है। मेजर शेखावत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 'ऐड-डी-कैंप' (ADC) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे भारतीय सेना की ओर से राष्ट्रपति की एडीसी नियुक्त होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं। इससे पूर्व भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी को राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।

कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा से शुरू हुआ मेजर नव्या शेखावत का सैन्य सफर

सशस्त्र बलों में सेवा देने का सपना देखने वाली मेजर नव्या शेखावत ने अपने सैन्य करियर का शुभारंभ कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा के माध्यम से किया। उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला (नॉन-टेक्निकल) पाठ्यक्रम की योग्यता सूची में स्थान अर्जित किया। इसके उपरांत उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई से अपना कठिन सैन्य प्रशिक्षण सफलता पूर्वक पूर्ण किया।

आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) में मिला कमीशन और त्वरित पदोन्नति

प्रशिक्षण संपन्न होने के पश्चात उन्हें भारतीय सेना की 'आर्मी सर्विस कॉर्प्स' (ASC) शाखा में कमीशन प्रदान किया गया। यह विंग सैन्य बलों की रसद, आपूर्ति, परिवहन और परिचालन संबंधी लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होती है। वर्ष 2021 के मध्य में सेना में शामिल हुईं शेखावत ने अपने उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के बल पर महज पांच वर्षों के भीतर मेजर का पद प्राप्त किया और वर्ष 2026 में देश के राष्ट्रपति की एडीसी नियुक्त हुईं।

क्या होती है राष्ट्रपति के एडीसी (ADC) की भूमिका?

राष्ट्रपति के एडीसी की जिम्मेदारी केवल सार्वजनिक आयोजकों में साथ रहने तक सीमित नहीं होती। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति की सहायता के लिए पांच एडीसी नियुक्त किए जाते हैं, जिनमें तीन थलसेना से, एक नौसेना से और एक वायुसेना से होते हैं। ये अधिकारी आधिकारिक समारोहों, राजकीय कार्यक्रमों और प्रोटोकॉल के दौरान राष्ट्रपति के प्रशासनिक व सैन्य समन्वय का कार्य संभालते हैं।

भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और ऐतिहासिक परिदृश्य

मेजर शेखावत भले ही भारतीय थलसेना से पहली महिला एडीसी हैं, परंतु इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बनने की उपलब्धि नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी के नाम दर्ज है, जिन्हें वर्ष 2025 में यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भारतीय सेना में महिलाओं का प्रवेश वर्ष 1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से प्रारंभ हुआ था। वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के बाद योग्य महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन (Permanent Commission) का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे सेना के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर उनकी भागीदारी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

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