विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, विद्यालयों में सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें- मुख्य सचिव

जयपुर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ द्वारा डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 11613/2025 में 11 अगस्त, 2026 को दिए गए निर्देशों की अनुपालना की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित आधारभूत संरचना, शौचालय, स्वच्छता एवं पेयजल सुविधाओं से संबंधित बिंदुओं पर विभागवार प्रगति और अनुपालना की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी जर्जर अथवा असुरक्षित विद्यालय भवन और कक्षा-कक्ष का उपयोग नहीं किया जाए। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित भवन और आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालय भवनों की सुरक्षा, मरम्मत एवं पुनर्निर्माण से संबंधित कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने को भी कहा।
श्री श्रीनिवास ने विद्यालयों में पेयजल की उपलब्धता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कोई भी विद्यालय पेयजल सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक विद्यालय में नल कनेक्शन अथवा समुचित वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालय, उनकी नियमित सफाई एवं रखरखाव और उचित जल निकासी सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही चिकित्सा, तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों सहित निजी एवं मेडिकल कॉलेजों में भी पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालय, पेयजल तथा स्वच्छता सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने विद्यालयों,उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज,तकनीकी कॉलेजो की सुरक्षा की सतत निगरानी के लिए संयुक्त निदेशकों को नियमित निरीक्षण कर शाला दर्पण पोर्टल पर स्थिति अद्यतन करने के निर्देश दिए। संभाग स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो विद्यालय सुरक्षा, बाल संरक्षण तथा जर्जर भवनों एवं कक्षा-कक्षों की स्थिति की नियमित समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। ग्राम पंचायतों के माध्यम से राजकीय विद्यालयों में नियमित साफ-सफाई एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को न्यायालय के निर्देशों की तथ्यात्मक एवं बिंदुवार अनुपालना सुनिश्चित करने तथा इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागों को अद्यतन आंकड़ों के आधार पर समेकित प्रगति रिपोर्ट तैयार रखने तथा शेष कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने को कहा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा श्री राजेश यादव ने बताया कि प्रदेश के 65 हजार 308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वेक्षण करवाया गया है। सर्वेक्षण में 3 हजार 768 जर्जर विद्यालय भवन तथा 83 हजार 783 जर्जर कक्षा-कक्ष चिन्हित किए गए। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर भवनों के उपयोग पर रोक लगाई गई है तथा प्रभावित विद्यालयों के संचालन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं।
श्री यादव ने बताया कि स्कूल आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 12 हजार 335.90 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 3 हजार 587 नए विद्यालय भवनों के निर्माण पर 2 हजार 487.75 करोड़ रुपये, 22 हजार 589 विद्यालयों की वृहद मरम्मत पर 1 हजार 129.45 करोड़ रुपये, 83 हजार 783 जर्जर कक्षा-कक्षों के स्थान पर नए कक्षा-कक्षों के निर्माण पर 8 हजार 378.30 करोड़ रुपये तथा 13 हजार 616 जर्जर शौचालयों के पुनर्निर्माण पर 340.40 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इस वर्ष स्कूल आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर 3 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राजकीय विद्यालय भवनों की स्वतंत्र तकनीकी सुरक्षा जांच के लिए आईआईटी जोधपुर और एमएनआईटी जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। आईआईटी जोधपुर की रिपोर्ट एवं अनुशंसाएं प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि एमएनआईटी जयपुर की रिपोर्ट अपेक्षित है। विद्यालय भवनों के निर्माण, पुनर्निर्माण एवं मरम्मत में राष्ट्रीय भवन संहिता, एनसीपीसीआर स्कूल सुरक्षा दिशा-निर्देश, बीआईएस मानकों तथा अन्य निर्धारित तकनीकी मानकों की पालना सुनिश्चित की जा रही है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा श्री कुलदीप रांका, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री ए. राठौड़ सहित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



