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समंदर में भारत की ताकत बढ़ी, INS निपुण नौसेना में शामिल; जानें इसकी खासियत

मुंबई | पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक संकट और बदलते वैश्विक रणनीतिक माहौल के बीच भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने सोमवार को मुंबई में एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समुद्री क्षेत्र के भीतर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। पश्चिम एशिया की उथल-पुथल, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरे और क्षेत्र में हो रहा सैन्यीकरण भारत के सुरक्षा हितों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में गोताखोरी पोत 'आईएनएस निपुण' के नौसेना बेड़े में शामिल होने से गहरे समुद्र में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव अभियानों, आपदा राहत और मानवीय सहायता देने की हमारी समग्र क्षमता को एक नई मजबूती मिलेगी।

समुद्री क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हैं चुनौतियां

मुंबई में आयोजित 'आईएनएस निपुण' के जलावतरण और नौसेना में शामिल किए जाने के अवसर पर अपनी बात रखते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि आज हम रणनीतिक रूप से एक बहुत बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। समंदर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है और सुरक्षा खतरों की प्रकृति भी अब तेजी से नए रूप ले रही है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरों के बीच पश्चिमी नौसेना कमान समुद्र में उभरने वाली इन सभी चुनौतियों से मुस्तैदी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हर संभावित खतरे से निपटने के लिए नौसेना मुस्तैद

नौसेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यद्यपि यह अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता कि देश को भविष्य में किस विशिष्ट समय पर किस प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हम हर संभावित और अप्रत्याशित खतरे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम ऐसी मजबूत और आधुनिक सामरिक क्षमताएं विकसित कर रहे हैं, जो हमें किसी भी दिशा से आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने में सक्षम बनाती हैं।

300 मीटर गहराई तक गोताखोरी में सक्षम है आईएनएस निपुण

एडमिरल स्वामीनाथन ने बताया कि देश का पूरा पश्चिमी तट पश्चिमी नौसेना कमान के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में 'आईएनएस निपुण' का बेड़े में शामिल होना भारतीय नौसेना की बहु-आयामी अभियानों की ताकत में एक मील का पत्थर साबित होगा।

  • गहरे समुद्र में गोताखोरी: इस जहाज में समुद्र की सतह से 300 मीटर तक की अत्यधिक गहराई में जाकर गोताखोरी अभियानों को संचालित करने और उनमें तकनीकी सहायता प्रदान करने की आधुनिक क्षमता मौजूद है।

  • पनडुब्बी बचाव अभियान: आईएनएस निपुण को इस तरह से डिजाइन और तैयार किया गया है कि जरूरत पड़ने पर यह कम से कम समय में प्रभावी पनडुब्बी बचाव (Submarine Rescue) अभियान को अंजाम दे सके।

  • आपदा राहत और मानवीय सहायता: इस पोत की भूमिका केवल विशुद्ध सैन्य अभियानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे आपदा के समय राहत पहुँचाने और मानवीय सहायता अभियानों के लिए भी तत्पर रखा जाएगा। यह जहाज संकट की हर घड़ी में भारतीय नौसेना की कार्यकुशलता को और अधिक विस्तार देगा।

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