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असम बाढ़ पीड़ितों के लिए कार्तिक आर्यन का बड़ा योगदान, CM ने की जमकर तारीफ

बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता कार्तिक आर्यन ने भीषण बाढ़ का सामना कर रहे असम राज्य की आर्थिक मदद के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। अभिनेता ने असम के मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये की उदार दान राशि भेजी है। उनके इस दरियादिल और मानवीय कदम की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से खुलकर प्रशंसा की है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने साझा की जानकारी

असम के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) के जरिए इस खबर को साझा करते हुए अभिनेता के प्रति आभार व्यक्त किया। सीएमओ ने अपने संदेश में लिखा, 'मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये का उदार योगदान देने के लिए अभिनेता कार्तिक आर्यन का हम दिल से आभार प्रकट करते हैं। माननीय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके इस सराहनीय कदम और राज्य के संकटपूर्ण समय में राहत कार्यों के लिए समय पर की गई इस मदद की भरपूर तारीफ की है।'

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस संदेश को रीपोस्ट करते हुए व्यक्तिगत रूप से भी अभिनेता का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा, 'आपके इस उदार सहयोग से सचमुच दिल गदगद हो गया है कार्तिक आर्यन, आपका यह योगदान असम के जरूरतमंद लोगों की सहायता में बेहद मददगार साबित होगा।'

बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आए अन्य सितारे

कार्तिक आर्यन का यह महत्वपूर्ण योगदान ऐसे समय में सामने आया है जब मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित चेहरे भी असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं और लोगों से सहायता की अपील कर रहे हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट, प्रसिद्ध गायक पापोन और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने भी असम के बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति अपना समर्थन जताया है। इसके अलावा, ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अभिनेता सलमान खान ने अपने फैन नेटवर्क के साथ मिलकर बाढ़ से जूझ रहे क्षेत्रों में राहत सामग्री और भोजन के पैकेट बांटने का कार्य शुरू कर दिया है।

असम में बाढ़ के हालात बने खतरनाक

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है। वर्तमान में भी कई जिलों में लाखों लोग बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अनगिनत परिवारों के आशियाने उजड़ गए हैं, आजीविका के साधन ठप हो गए हैं और आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

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