मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के 10 शहर होंगे स्मार्ट, AI कैमरों से बढ़ेगी सुरक्षा

भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस की निगरानी व्यवस्था में एक बड़ा और तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। अब पुलिस की नजर केवल घटना घटने के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगालने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 'सेफ सिटी अभियान' के तहत राज्य में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैमरे लगाए जाएंगे। यह आधुनिक कैमरे संदिग्ध गतिविधियों और तय मानकों वाली परिस्थितियों को भांपकर सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को रियल-टाइम अलर्ट भेजने का काम करेंगे।

पहले चरण में 10 शहरों में लगेंगे 25 हजार कैमरे

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के तहत प्रदेश के 10 प्रमुख शहरों में लगभग 25,000 एआई-बेस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की तैयारी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना के अगले चरणों में इस नेटवर्क को बढ़ाकर पूरे प्रदेश में करीब सवा लाख कैमरों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले चरण में जिन 10 शहरों को शामिल किया गया है, उनमें छह स्मार्ट सिटी— इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना—के साथ-साथ भोपाल और अन्य चयनित शहर भी शामिल हैं। इन शहरों में पहले से मौजूद निगरानी ढांचे को नए एआई नेटवर्क से जोड़कर पुराने निवेश का भी पूरा सदुपयोग किया जाएगा।

महिला सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष जोर

इस नई तकनीकी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पुलिसकर्मियों को हर समय स्क्रीन पर नजर गड़ाए नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि सिस्टम खुद असामान्य गतिविधि का संकेत देकर उनका ध्यान उस ओर आकर्षित करेगा। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • महिला सुरक्षा: किसी सुनसान या संवेदनशील स्थान पर अकेली महिला की मौजूदगी जैसी निर्धारित परिस्थितियों में यह सिस्टम स्वतः अलर्ट जनरेट कर सकेगा।

  • ट्रैफिक नियंत्रण: यातायात प्रबंधन, भारी भीड़ की निगरानी और सार्वजनिक स्थलों पर संदिग्ध हरकतों की त्वरित पहचान की जाएगी।

  • त्वरित प्रतिक्रिया: इसका मुख्य उद्देश्य घटना के बाद जांच करने के साथ-साथ अपराध होने के दौरान या उससे ठीक पहले पुलिस की प्रतिक्रिया को तेज करना है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई पुलिस के सत्यापन और परिस्थितियों के आकलन के बाद ही होगी।

पुराने कैमरे भी जुड़ेंगे नेटवर्क से

यह परियोजना केवल नए उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस के मौजूदा बुनियादी ढांचे को भी एकीकृत किया जा रहा है। थानों में पहले से लगे कैमरों और 'डायल-112' वाहनों के कैमरों को भी केंद्रीय कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा, जिससे एक ही छत के नीचे व्यापक निगरानी संभव हो सकेगी।

प्रशासनिक चुनौतियां और आगे की राह

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक में इस पर व्यापक चर्चा के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया गया है। पुलिस मुख्यालय अब इसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर एआई कैमरों का नेटवर्क खड़ा करने के बाद असली चुनौती इसके प्रबंधन की होगी। इसके लिए एक मजबूत केंद्रीय कंट्रोल रूम, अत्यधिक प्रशिक्षित स्टाफ, तकनीकी रखरखाव और गलत अलर्ट से निपटने की स्पष्ट व्यवस्था बेहद जरूरी होगी, ताकि कैमरे केवल रिकॉर्डिंग डिवाइस न रहकर पुलिस के लिए एक प्रभावी रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम बन सकें।

 

Related Articles

Back to top button